प्रयागराज न्यूज डेस्क: जारी–देवरा मार्ग की हालत देखकर कोई भी समझ सकता है कि विकास यहां आकर जैसे रुक सा गया है। कभी इस रास्ते को जीवनरेखा माना जाता था, लेकिन आज उस पर चलना भी खतरे से खाली नहीं। गड्ढों का ऐसा सिलसिला है कि यह समझ पाना मुश्किल हो जाता है कि सड़क कहाँ खत्म होती है और गड्ढे कहाँ शुरू। बच्चे स्कूल जाते समय गिर जाते हैं, किसानों के ट्रैक्टर फिसल जाते हैं, और गर्भवती महिलाओं के लिए तो हर सफर किसी परीक्षा जैसा हो गया है—यह सब अब रोज की बातें बन चुकी हैं।
ग्रामीण बताते हैं कि सालों से बस आश्वासन मिलता रहा, लेकिन सड़क की दशा जस की तस है। बरसात हो तो पूरा रास्ता नदी जैसा दिखता है, और सूखे मौसम में धूल का ऐसा गुबार उठता है कि आंखें खुली रखना मुश्किल हो जाए। गड्ढों में भरा कीचड़, उखड़ा डामर, धंसे किनारे और जगह-जगह बने कच्चे हिस्से खुद कहानी बयान करते हैं कि सड़क नहीं, किस्मत टूट पड़ी है। यह मार्ग सिर्फ आवाजाही का रास्ता नहीं था, बल्कि इलाके के जीवन को जोड़ने वाला मुख्य जरिया था, लेकिन अब यह रिश्ता ही कमजोर पड़ चुका है।
सड़क के किनारों पर रोज नए गड्ढे बनते हैं और कई इतने गहरे हो गए हैं कि आधा टायर तक समा जाता है। बारिश में तो पूरी सड़क तालाब बन जाती है और वाहन चालक अंदाजा ही नहीं लगा पाते कि रास्ता कहाँ है। दुर्घटनाएँ, फंस जाते वाहन और घंटों की मशक्कत—यही रोज का हाल है। पिछले महीने ग्रामीणों ने जारी बाजार में धरना देकर आवाज उठाई। थोड़े बहुत मरम्मत के काम शुरू भी हुए, लेकिन दो दिन बाद सब बंद हो गया। इस रास्ते से किसान अपनी उपज लेकर बाजार जाते हैं, लेकिन खराब सड़क के कारण ट्रैक्टर और ठेले बार-बार धंस जाते हैं, जिससे किसानों की कमर ही टूट गई है।
इस मार्ग से बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे भी गुजरते हैं, और स्कूल के सामने ही सड़क का सबसे खराब हिस्सा होने से बच्चों का फिसलना आम हो गया है। महिलाओं के लिए इस रास्ते पर चलना बेहद कठिन है। गांव की रीता देवी बताती हैं कि रात में किसी को अस्पताल ले जाना पड़े तो हालत और खराब हो जाती है। गाड़ी में बैठना मुश्किल, झटके इतने तेज कि गर्भवती महिलाओं के लिए अतिरिक्त खतरा पैदा हो जाता है। कई मामलों में तेज हिचकोलों से स्थिति बिगड़ चुकी है, लेकिन फिर भी मरम्मत का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा।