भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की ताजा रिपोर्ट ने देश की आर्थिक सेहत को लेकर बेहद उत्साहजनक आंकड़े पेश किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2025 में भारत का प्राइवेट कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) 67% बढ़कर 7.7 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 4.6 लाख करोड़ रुपये था। इसे निवेश चक्र (Investment Cycle) में अब तक का सबसे बड़ा सुधार माना जा रहा है।
सेक्टरवार निवेश का लेखा-जोखा
CII ने लगभग 1,200 कंपनियों (CMIE Prowess डेटाबेस) का विश्लेषण कर बताया है कि निवेश की यह लहर किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है:
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मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर (सबसे बड़ा हिस्सेदार): कुल निजी निवेश का लगभग आधा हिस्सा (3.8 लाख करोड़ रुपये) इसी सेक्टर से आया। इसमें मुख्य रूप से मेटल, ऑटोमोबाइल और केमिकल क्षेत्रों का दबदबा रहा।
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सर्विसेज सेक्टर (40% योगदान): सेवा क्षेत्र ने 3.1 लाख करोड़ रुपये का योगदान दिया। इसे मुख्य रूप से आईटी (IT/ITeS), ट्रेड और कम्युनिकेशन सेक्टर से मजबूती मिली।
क्यों बढ़ रहा है निवेश? (मुख्य संकेतक)
CII के डायरेक्टर जनरल चंद्रजीत बनर्जी ने निवेश में आए इस निर्णायक मोड़ के पीछे तीन प्रमुख कारण बताए हैं:
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कैपेसिटी यूटिलाइजेशन: कंपनियों की उत्पादन क्षमता का उपयोग 74.3% से बढ़कर 75.6% हो गया है, जिसका मतलब है कि मांग बढ़ रही है।
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नए ऑर्डर्स: ऑर्डर बुक में सालाना आधार पर 10.3% की शानदार बढ़ोतरी देखी गई है।
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बैंक क्रेडिट ग्रोथ: वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में बैंक क्रेडिट ग्रोथ 14% रही, जो पहली छमाही (10%) के मुकाबले काफी बेहतर है।
चुनौतियों के बीच CII का '5-सूत्रीय एजेंडा'
पश्चिम एशिया (Mid-East) में जारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए, CII ने इकोनॉमी की गति बनाए रखने के लिए सरकार को 5 सुझाव दिए हैं:
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ऊर्जा सुरक्षा: वैश्विक संकट के बीच ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना।
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सप्लाई चेन: वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाओं को दूर करना।
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नीतिगत निरंतरता: निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियों को स्थिर रखना।
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निर्यात प्रोत्साहन: मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में भारत की स्थिति मजबूत करना।
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इंफ्रास्ट्रक्चर: लॉजिस्टिक्स लागत कम करने के लिए बुनियादी ढांचे में तेजी लाना।