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नवाचार और आत्मनिर्भरता, पीयूष गोयल का उद्योग जगत को 2 ट्रिलियन डॉलर निर्यात का मंत्र

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Posted On:Wednesday, May 13, 2026

नयी दिल्ली: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय उद्योग जगत के समक्ष एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखते हुए 'निर्यात वृद्धि और आयात कटौती' को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने का आह्वान किया है। मंगलवार, 12 मई 2026 को भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के वार्षिक शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था एक सुरक्षित और मजबूत स्तंभ के रूप में उभरी है। उन्होंने उद्योगों से अगले छह वर्षों के भीतर 2 लाख करोड़ डॉलर (2 Trillion Dollars) के निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 15% की वार्षिक वृद्धि दर बनाए रखने का आग्रह किया।

तकनीक और नवाचार से बदलेगी विनिर्माण की सूरत

वाणिज्य मंत्री ने जोर दिया कि आत्मनिर्भर भारत का मार्ग केवल सरकारी नीतियों से नहीं, बल्कि उद्योगों की दक्षता से प्रशस्त होगा।

  • एआई और रोबोटिक्स: गोयल ने उद्योग जगत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम कंप्यूटिंग अपनाने की सलाह दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई का उपयोग कर्मचारियों की छंटनी के लिए नहीं, बल्कि उत्पादकता बढ़ाने, बर्बादी कम करने और वैश्विक बाजारों में विस्तार के लिए किया जाना चाहिए।

  • क्षेत्रीय ताकत: ऑटोमोबाइल, स्टील और स्टार्टअप्स जैसे क्षेत्रों को उन्होंने नवाचार का इंजन बताया, जो भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखला में शीर्ष पर ले जा सकते हैं।

मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का लाभ उठाने की अपील

गोयल ने बताया कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में 38 देशों के साथ 9 महत्वपूर्ण मुक्त व्यापार समझौते किए हैं, जो मुख्य रूप से विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ हैं।

  1. वैश्विक पूरकता: उन्होंने तर्क दिया कि स्विट्जरलैंड, अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे देश भारत के प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि पूरक हैं। इन देशों के पास उच्च तकनीक है, जबकि भारत के पास प्रतिस्पर्धी विनिर्माण लागत और अपार प्रतिभा है।

  2. आयात बिल में कमी: ऊर्जा दक्षता के माध्यम से भारत पहले ही प्रति वर्ष 10 अरब डॉलर की बचत कर रहा है। गोयल ने उद्योगों से स्थानीय स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादन को बढ़ावा देने की अपील की ताकि अनावश्यक आयात पर निर्भरता कम हो सके।

वाणिज्य मंत्री ने विश्वास जताया कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार, जो 11 महीने के आयात के लिए पर्याप्त है, देश को किसी भी वैश्विक आर्थिक झटके से बचाने में सक्षम है। अब समय आ गया है कि 'मेक इन इंडिया' को 'मेक फॉर द वर्ल्ड' के संकल्प के साथ आगे बढ़ाया जाए।


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