प्रयागराज न्यूज डेस्क: प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल में डॉक्टरों और वकीलों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद अस्पताल प्रशासन ने बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए एक साथ 20 डॉक्टरों को निलंबित कर दिया है। यह पहली बार है जब प्रयागराज मंडल में इतनी बड़ी संख्या में डॉक्टरों पर एक साथ कार्रवाई की गई है। विवाद की शुरुआत घायल महिला अधिवक्ता के इलाज को लेकर हुई कहासुनी से हुई, जो देखते ही देखते मारपीट और हंगामे में बदल गई। घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और दोनों पक्षों के बीच तनावपूर्ण माहौल बन गया।
बताया गया कि झूंसी निवासी महिला अधिवक्ता जागृति शुक्ला सड़क हादसे में घायल होने के बाद इलाज के लिए स्वरूप रानी अस्पताल लाई गई थीं। उनके साथ मौजूद अधिवक्ताओं का आरोप है कि उस समय डॉक्टर मौजूद नहीं थे और इलाज में देरी हो रही थी। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ा और फिर डॉक्टरों व अधिवक्ताओं के बीच धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू हो गई। महिला अधिवक्ताओं ने अस्पताल परिसर में अभद्रता और मारपीट के गंभीर आरोप लगाए हैं। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया।
घटना के विरोध में डॉक्टरों ने काम का बहिष्कार कर दिया, जिससे अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो गईं और दूर-दराज से आए मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं वकीलों ने भी सड़क पर धरना प्रदर्शन किया। प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों की कई दौर की बैठकों के बाद दोनों पक्षों को शांत कराया गया। इसके बाद धीरे-धीरे ओपीडी और ट्रॉमा सेंटर की सेवाएं बहाल की गईं। मेडिकल एसोसिएशन और जिला प्रशासन ने भी मामले को शांत कराने में अहम भूमिका निभाई।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि प्राथमिक जांच में अनुशासनहीनता और अस्पताल का माहौल बिगाड़ने के आरोप सही पाए गए, जिसके बाद 20 डॉक्टरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। प्रशासन ने साफ किया कि स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित करना और हिंसा किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जाएगी। इस कार्रवाई को प्रयागराज के चिकित्सा इतिहास में एक बड़ा और सख्त प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।