भारत सरकार अब वैश्विक व्यापार के पटल पर अपनी स्थिति को और मजबूत करने के लिए एक आक्रामक रणनीति पर काम कर रही है। केंद्र सरकार का उद्देश्य केवल विभिन्न देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय जमीनी स्तर पर इन समझौतों का अधिकतम लाभ उठा सकें। सरकार ने वर्ष 2030 तक कुल निर्यात (गुड्स और सर्विसेज) को 2 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने यूएई, ऑस्ट्रेलिया, मॉरीशस और ईएफटीए (EFTA) देशों सहित करीब 38 देशों के साथ महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौते किए हैं। इन देशों का कुल आयात बाजार लगभग 12 ट्रिलियन डॉलर का है, जो भारतीय निर्यातकों के लिए असीम संभावनाओं के द्वार खोलता है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल लगातार औद्योगिक संगठनों और निर्यात परिषदों के साथ बैठकें कर रहे हैं ताकि कृषि, टेक्सटाइल, फार्मा, और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों में 'ड्यूटी-फ्री' पहुंच का सही इस्तेमाल किया जा सके।
इस नई कार्ययोजना के तहत, सरकार का विशेष ध्यान कृषि और फिशरीज (मछली पालन) उत्पादों पर है। भारतीय दूतावासों और मिशनों को विदेशों में 'ब्रांड इंडिया' को प्रमोट करने और व्यापारिक बाधाओं को दूर करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मकसद साफ है—घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना और स्थानीय उत्पादों को दुनिया के कोने-कोने तक पहुँचाना। यदि भारतीय कंपनियां इन समझौतों का कुशलता से लाभ उठाती हैं, तो यह न केवल देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाएगा, बल्कि लाखों नए रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा।