प्रयागराज न्यूज डेस्क: माघ मेला 2026 की तैयारियों के तहत इस बार मेला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। गंगा की धारा झूंसी की ओर खिसकने के कारण 350 से अधिक संस्थाओं की जमीन दूसरे सेक्टरों में स्थानांतरित की गई है। झूंसी साइड के काली मार्ग, त्रिवेणी मार्ग और अक्षयवट मार्ग पर लगने वाली कई संस्थाओं को अब सेक्टर दो, पांच और छह में जगह दी गई है। इसी के अनुसार संस्थाओं को सुविधा पर्ची का आवंटन किया जा रहा है।
प्रशासन के मुताबिक संगम के पास सेक्टर एक में जगह कम होने से वहां की कुछ संस्थाओं की भूमि में कटौती की गई है, जबकि सेक्टर चार की 50 से अधिक संस्थाओं को सेक्टर छह में शिफ्ट किया गया है। वहीं सेक्टर पांच की करीब 45 संस्थाओं को सेक्टर दो में त्रिवेणी और काली मार्ग पर बसाया गया है। गंगा की धारा नागवासुकी से दारागंज की ओर और पुराने रेलवे पुल से झूंसी की तरफ बढ़ने के कारण यह बदलाव जरूरी हो गया था।
इस बदलाव के बाद सेक्टर एक और दो में अपेक्षाकृत ज्यादा जगह उपलब्ध हो गई है, जबकि सेक्टर चार और पांच में जगह कम हो गई है। झूंसी साइड की त्रिवेणी और काली मार्ग की संस्थाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं। कुछ संस्थाओं को सेक्टर एक और दो में स्थान मिला है, जबकि बड़ी संख्या में सेक्टर पांच और छह में शिविर लगाए जा रहे हैं। उप मेलाधिकारी विवेक शुक्ल के अनुसार, गंगा की बदली धारा को देखते हुए संस्थाओं का विस्थापन किया गया है ताकि मेला सुरक्षित और सुव्यवस्थित ढंग से आयोजित हो सके।
माघ मेला क्षेत्र करीब 800 हेक्टेयर में बसाया जा रहा है। यहां श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 20-20 बेड के दो अस्पताल, 12 पीएचसी, 50 एंबुलेंस, पांच आयुर्वेदिक और पांच होम्योपैथिक अस्पताल बनाए जा रहे हैं। इसके साथ ही 25 हजार शौचालय, आठ हजार डस्टबिन, 3300 सफाईकर्मी, 17 थाने, 42 पुलिस चौकियां और 20 फायर टेंडर तैनात किए जाएंगे। प्रशासन ने 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया है, जिसके लिए ट्रैफिक और भीड़ प्रबंधन को लेकर व्यापक योजना तैयार की जा रही है।