प्रयागराज न्यूज डेस्क: रेलवे स्टेशनों पर उपद्रव करने, गंदगी फैलाने या छोटे-मोटे अपराधों में शामिल होने वाले लोगों के लिए अब सजा का तरीका बदलने वाला है। रेलवे ने जन विश्वास 2.0 संशोधन विधेयक 2026 के तहत अपने नियमों में बड़े बदलाव लागू किए हैं। 8 अप्रैल को गजट नोटिफिकेशन जारी होने के साथ ही ये नए प्रावधान प्रभावी हो गए हैं। इनका मुख्य उद्देश्य छोटी गलतियों के लिए जेल भेजने के बजाय दोषियों के व्यवहार में सुधार लाना है।
नए नियमों की सबसे बड़ी विशेषता कम्युनिटी सर्विस (सामुदायिक सेवा) का प्रावधान है। अब स्टेशन पर हंगामा करने या अव्यवस्था फैलाने वाले दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजने के बजाय उनसे स्टेशन की सफाई जैसे सामाजिक कार्य कराए जा सकते हैं। इस संशोधन के माध्यम से कई छोटे तकनीकी अपराधों को 'डिक्रिमिनलाइज' (कारावास मुक्त) कर दिया गया है, जिससे जेलों पर बढ़ते बोझ को कम किया जा सके।
प्रमुख बदलाव और जुर्माना राशि:
अवैध वेंडिंग: बिना अनुमति सामान बेचने पर पहली बार पकड़े जाने पर 2,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। दूसरी बार यही गलती दोहराने पर जुर्माना 5,000 रुपये तक हो सकता है।
अन्य उल्लंघन: रेलवे ट्रैक पार करना, महिला कोच में अनधिकृत प्रवेश और नशा करने जैसे अपराधों के लिए भी जुर्माने की राशि में भारी बढ़ोतरी की गई है।
सजा का स्वरूप: कारावास के स्थान पर अब आर्थिक दंड और श्रम दान (सामुदायिक सेवा) पर अधिक जोर दिया गया है।
रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के अधिकारियों के अनुसार, कानून तो लागू हो गया है, लेकिन इसके क्रियान्वयन की बारीक गाइडलाइंस का अभी इंतजार है। वर्तमान में यह स्पष्ट होना बाकी है कि आरपीएफ सीधे मौके पर जुर्माना वसूल सकेगी या नहीं। फिलहाल, पकड़े गए आरोपियों को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की पुरानी प्रक्रिया ही जारी है। जैसे ही विस्तृत 'वर्किंग रूल्स' आएंगे, स्टेशन पर ही कम्युनिटी सर्विस और जुर्माने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।