ताजा खबर

अल-फलाह यूनिवर्सिटी के फाउंडर जवाद अहमद सिद्दीकी के काले कारनामे हुए उजागर, मर चुके लोगों की जमीनों का किया सौदा

Photo Source :

Posted On:Saturday, November 29, 2025

नई दिल्ली। दिल्ली में हाल ही में हुए कार ब्लास्ट मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच अब एक बड़े और सनसनीखेज जमीन घोटाले की ओर इशारा कर रही है। इस मामले में पहले से ही मनी लॉन्ड्रिंग और ब्लास्ट के आरोपों में ED की हिरासत में चल रहे अल-फलाह ग्रुप के संस्थापक, जवाद अहमद सिद्दीकी पर अब करोड़ों रुपये की सरकारी/कीमती जमीन को फर्जी कागजात के माध्यम से हथियाने का नया आरोप लगा है। जांच में सामने आया है कि सिद्दीकी से जुड़े एक संगठन, तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन, ने एक बेहद कीमती जमीन को धोखे से हासिल करने के लिए एक भयावह तरीका अपनाया।

फर्जी GPA और 'मर चुके' हस्ताक्षरकर्ता

अल-फलाह मामले की जाँच से पता चला है कि दिल्ली के मदनपुर खादर क्षेत्र के खसरा नंबर 792 में स्थित कीमती जमीन को तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन ने एक नकली जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) के जरिए हड़प लिया। यह जमीन दक्षिण दिल्ली में एक रणनीतिक स्थान पर फैली हुई है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस नकली GPA का इस्तेमाल किया गया, उस पर जिन लोगों के हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लगाए गए थे, वे कई साल या यूँ कहें कि दशकों पहले ही मर चुके थे।

1972 से 1998 के बीच मृत लोगों के नाम

अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, यह नकली GPA 7 जनवरी 2004 की तारीख का है। इस दस्तावेज में यह दावा किया गया कि कई सह-मालिक (Co-owners) अपनी जमीन को विनोद कुमार/पुत्र-भूले राम के पक्ष में हस्तांतरित करने के लिए सहमत हुए हैं। हैरानी की बात यह है कि इस फर्जी GPA में कई ऐसे लोगों के नाम शामिल थे जिनकी मृत्यु GPA तैयार होने की तारीख (2004) से बहुत पहले, यानी साल 1972 से लेकर 1998 के बीच ही हो चुकी थी। इसके बावजूद, इन सभी मृत व्यक्तियों को 2004 में 'जमीन बेचने वाले' के तौर पर दिखाया गया। एक अधिकारी ने इस दस्तावेज को पूरी तरह फर्जी और अवैध करार देते हुए कहा कि कोई भी मृत व्यक्ति पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) नहीं दे सकता।

फर्जी GPA से फाउंडेशन को जमीन ट्रांसफर

इस पूरी धोखाधड़ी का अगला चरण 27 जून 2013 को सामने आया। इसी फर्जी GPA के आधार पर, एक रजिस्टर्ड सेल डीड (Registered Sale Deed) तैयार की गई, जिसके जरिए जमीन को महज 75 लाख रुपये में तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन को हस्तांतरित कर दिया गया।

विनोद कुमार ने कई सह-मालिकों के तौर पर इस डीड पर हस्ताक्षर किए। इस प्रक्रिया में, मरे हुए लोगों के अविभाजित शेयरों को ऐसे बेचा गया जैसे वे जीवित हों और अपनी सहमति दे रहे हों। पुलिस जांच में यह स्पष्ट रूप से सामने आया है कि सभी जीपीए (GPA) फर्जी थे, उनके हस्ताक्षर जाली थे, और इन अवैध दस्तावेजों का सीधा लाभ तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन को पहुँचा। जवाद अहमद सिद्दीकी पर लगे ये नए आरोप, दिल्ली ब्लास्ट और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर मामलों की तह तक जाने वाली जांच में एक नया और गहरा मोड़ साबित हो सकते हैं।


प्रयागराज और देश, दुनियाँ की ताजा ख़बरे हमारे Facebook पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें,
और Telegram चैनल पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



You may also like !

मेरा गाँव मेरा देश

अगर आप एक जागृत नागरिक है और अपने आसपास की घटनाओं या अपने क्षेत्र की समस्याओं को हमारे साथ साझा कर अपने गाँव, शहर और देश को और बेहतर बनाना चाहते हैं तो जुड़िए हमसे अपनी रिपोर्ट के जरिए. prayagrajvocalsteam@gmail.com

Follow us on

Copyright © 2021  |  All Rights Reserved.

Powered By Newsify Network Pvt. Ltd.