प्रयागराज न्यूज डेस्क: प्रयागराज में मानसून की सुस्ती किसानों पर भारी पड़ रही है। बारिश न होने से धान की खेती संकट में आ गई है। जिन किसानों ने किसी तरह नहरों और निजी संसाधनों के सहारे नर्सरी तैयार कर ली, वे अब रोपाई के लिए बारिश का इंतजार कर रहे हैं। वहीं जिन खेतों में रोपाई हो चुकी है, वहां पानी की कमी से धान के पौधे पीले पड़ने लगे हैं और सूखने का खतरा बढ़ गया है।
किसानों का कहना है कि पिछले एक सप्ताह से बारिश नहीं होने के कारण खेतों की नमी खत्म होती जा रही है। सावन में भी तेज धूप और उमस ने हालात और खराब कर दिए हैं। किसान राम भरोसे, शंकर लाल, मनोज कुमार और गरीब दास के मुताबिक बादल तो आते हैं, लेकिन बिना बरसे लौट जाते हैं। ऐसे में धान की फसल पर संकट गहराता जा रहा है और दोबारा रोपाई की नौबत आ सकती है, जिससे लागत भी बढ़ जाएगी।
नवाबगंज और कौड़िहार के तराई क्षेत्र में सूखी नहरों ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। सिंचाई के लिए अब ट्यूबवेल ही सहारा हैं, लेकिन लगातार बिजली कटौती के कारण खेतों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है। किसानों का कहना है कि कई सालों से नहरों में पानी नहीं आया है और तेज धूप के कारण करीब 25 प्रतिशत धान की बेहन खेतों में ही खराब हो चुकी है।
उपनिदेशक कृषि डॉ. पवन विश्वकर्मा ने बताया कि पिछले दिनों हुई बारिश से कुछ क्षेत्रों में राहत मिली है और कोरांव में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि जहां पर्याप्त बारिश की संभावना कम है, वहां किसानों को धान के बजाय श्रीअन्न (मोटे अनाज) जैसी वैकल्पिक फसलों की बुवाई पर भी विचार करना चाहिए।