प्रयागराज न्यूज डेस्क: टोंस और बेलन नदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे कम होने लगा है, लेकिन यमुनापार के बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। गुरुवार शाम चार बजे टोंस 85.31 मीटर और बेलन 101.56 मीटर पर बह रही थी। शुक्रवार शाम तक टोंस का जलस्तर घटकर 83.96 मीटर और बेलन का 100.22 मीटर हो गया। इसके बावजूद 30 गांवों के करीब 250 परिवारों को राहत नहीं मिल पाई है।
पानी उतरने के साथ खेत, खलिहान और मकान अब बाढ़ के पानी से बाहर आने लगे हैं, लेकिन इनके साथ नई परेशानियां सामने आ रही हैं। मेजा के कोना गांव में पानी कम होने के बाद जगह-जगह गंदगी और तेज दुर्गंध फैल गई है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ में घर का काफी सामान खराब हो गया। वहीं सिंहपुर-कोना मार्ग पर अब भी करीब दो फीट पानी भरा हुआ है, जिससे लोगों का आना-जाना मुश्किल बना हुआ है।
करछना के खपटिहा गांव में टोंस का पानी घटने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली, लेकिन घरों की हालत देखकर उनकी चिंता बढ़ गई। जितेंद्र कुमार, पन्नालाल और विक्रम ने बताया कि उन्होंने किसी तरह जरूरी सामान बचा लिया, लेकिन कच्चे घरों में रखा भूसा खराब हो गया। घर के बाहर से लेकर अंदर तक कीचड़ जमा है और बाढ़ पीड़ितों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इसे साफ करने की है। कोहड़ार, पुराना डीह और इसौटा में भी गेहूं-चावल समेत खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान हुआ है।
शंकरगढ़ के सतपुरा गांव में पानी कम होने के बाद अब कीचड़ और गंदगी का अंबार लगा है। सड़क कट जाने से ग्रामीणों का आवागमन भी प्रभावित है। ग्रामीणों के मुताबिक बाढ़ के बाद सबसे बड़ी समस्या पीने के पानी की हो गई है, क्योंकि कुएं और हैंडपंप दूषित हो चुके हैं। ऐसे में पानी उतरने के बावजूद प्रभावित इलाकों में साफ-सफाई, पेयजल और रास्तों को लेकर प्रशासन से जल्द मदद की जरूरत बनी हुई है।