प्रयागराज न्यूज डेस्क: जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में परिषदीय स्कूलों के सामाजिक विज्ञान शिक्षकों के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर खत्म हो गया। प्रशिक्षण के इस पांचवें चरण का मकसद था कि शिक्षक एनईपी 2020 के अनुसार विषय को और ज्यादा व्यावहारिक, सरल और विद्यार्थी-केंद्रित तरीके से पढ़ा सकें। मांडा, धनुपुर, कौड़िहार-2 और चाका ब्लॉक से आए लगभग 70 चयनित शिक्षकों ने इसमें हिस्सा लिया।
सत्र के दौरान शिक्षकों को सामाजिक विज्ञान पढ़ाने के कई नए और व्यावहारिक तरीकों से अवगत कराया गया। खासतौर पर फसल चक्र जैसे विषयों को गतिविधि आधारित तरीके से समझाने और अक्षांश-देशांतर की मदद से पृथ्वी की संरचना को सरल भाषा में पेश करने के उपायों पर जोर दिया गया। प्रशिक्षकों ने बताया कि इन तरीकों से बच्चे विषय से ज्यादा जुड़ाव महसूस करेंगे और कक्षा में सक्रिय रहेंगे।
इसके साथ ही भारत की शासन व्यवस्था, सरकार की संरचना, अनुभव आधारित शिक्षण, प्रभावी कक्षा प्रबंधन और मूल्यांकन की नई तकनीकों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। उद्देश्य यही था कि शिक्षक केवल पढ़ाएं नहीं, बल्कि बच्चों को विषय का वास्तविक अर्थ और उसके जीवन से जुड़ाव को समझा सकें।
पूरे प्रशिक्षण में इस बात पर सामूहिक रूप से फोकस रहा कि सामाजिक विज्ञान को एनईपी 2020 के अनुरूप कौशल आधारित और अन्वेषणात्मक बनाया जाए। प्राचार्य राजेंद्र प्रताप और प्रवक्ता पंकज कुमार यादव ने शिक्षकों को प्रेरित किया कि वे कक्षा में जीवंत माहौल बनाएं और बच्चों को प्रासंगिक अनुभवों के साथ सीखने का मौका दें। विशेषज्ञों जैसे वीरभद्र प्रताप, डॉ. कुलभूषण मौर्य, नवनीत द्विवेदी, रूपचंद गौतम और पूर्णेंदु तिवारी ने आधुनिक शिक्षण तकनीकों पर अपने सुझाव साझा किए।