प्रयागराज न्यूज डेस्क: कलेक्ट्रेट के रिकॉर्ड रूम में रखे दशकों पुराने महत्वपूर्ण दस्तावेज अब रखरखाव के अभाव में नष्ट होने की कगार पर पहुंच गए हैं। स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि कई फाइलों को दीमक चाट रही है, जबकि कुछ दस्तावेज हल्का सा छूने पर ही बिखर जाते हैं। इन रिकॉर्ड्स में जमीन, नजूल और राजकीय संपत्तियों से जुड़े ऐसे दस्तावेज भी शामिल हैं, जो कई वर्षों पुराने विवादों के निपटारे में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
कलेक्ट्रेट की स्थापना के समय से संचालित इस रिकॉर्ड रूम में सैकड़ों साल पुराने अभिलेख सुरक्षित रखे गए थे। जमीन और संपत्ति विवादों के मामलों में अक्सर लोग इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर न्याय की उम्मीद लेकर यहां पहुंचते हैं। लेकिन रिकॉर्ड की खराब हालत के कारण कई फरियादियों को जरूरी दस्तावेज नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे उन्हें कानूनी प्रक्रिया में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों और वादकारियों का कहना है कि वर्ष 1960 से 1980 के बीच के कई रिकॉर्ड लगभग पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं। ऐसे में अनेक मामलों में साक्ष्य उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं, जिससे न्याय मिलने में भी बाधा आ रही है। रिकॉर्ड रूम की स्थिति को लेकर लंबे समय से चिंता जताई जा रही है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है।
रिकॉर्ड रूम के नोडल अधिकारी और एडीएम नागरिक आपूर्ति विजय शर्मा ने भी माना है कि अभिलेखों की स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि जगह की कमी के कारण वर्ष 2017 से नए रिकॉर्ड लेना बंद कर दिया गया था। पुराने दस्तावेजों के संरक्षण के लिए डिप्टी कलेक्टर टी.पी. सिंह के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई है, जो सुरक्षित और क्षतिग्रस्त अभिलेखों को अलग करने का काम कर रही है। हालांकि रिकॉर्ड के डिजिटाइजेशन को लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट योजना सामने नहीं आई है।