प्रयागराज न्यूज डेस्क: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने न्यायपालिका के खिलाफ सोशल मीडिया पर की जा रही अभद्र टिप्पणियों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि फैसलों की निष्पक्ष आलोचना और सूचित टिप्पणी की सीमा से आगे जाकर की गई ऑनलाइन गालियां आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आ सकती हैं। ऐसे मामलों में सख्त अवमानना कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
24 फरवरी को आपराधिक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर सोशल मीडिया पर न्यायपालिका के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों की बाढ़ सी आ गई है। अदालत ने कहा कि इस तरह की वर्चुअल अभद्रता स्वीकार्य अभिव्यक्ति की सीमा को पार करती है।
पीठ ने टिप्पणी की कि यदि अदालत ने ऐसे पोस्टों का अवमानना अधिकार क्षेत्र में संज्ञान लिया, तो संबंधित व्यक्तियों को कड़े कानूनी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। अदालत ने जनता को आगाह करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले स्पष्ट रूप से अवमाननापूर्ण शब्द दंडात्मक कार्रवाई को आमंत्रित कर सकते हैं।
यह टिप्पणी उस समय आई जब उच्च न्यायालय के अधिवक्ता ने दलील दी कि आपराधिक अवमानना के मामले “दिनचर्या” बनते जा रहे हैं। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि उठाई गई चिंता निराधार नहीं है और उसमें पर्याप्त गंभीरता है। हालांकि फिलहाल न्यायालय ने औपचारिक रूप से संज्ञान नहीं लिया है, लेकिन सोशल मीडिया पर बढ़ती आपत्तिजनक टिप्पणियों पर उसने गंभीर न्यायिक ध्यान अवश्य आकर्षित किया है।