प्रयागराज न्यूज डेस्क: प्रयागराज में तीन सितंबर की देर रात पुलिस आयुक्त पीयूष मोर्डिया ने जिले की चारों एसओजी टीमों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया। सेंट्रल, नगर, गंगानगर और यमुनानगर एसओजी में तैनात कुल 44 पुलिसकर्मियों को अपने-अपने पुलिस उपायुक्त के सामने रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। अचानक हुई इस कार्रवाई के पीछे पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई गई है, लेकिन इसे मांडा के कोसड़ा कला गांव में करोड़ों रुपये की एमडी ड्रग फैक्ट्री पकड़े जाने से जोड़कर देखा जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, सेंट्रल एसओजी में प्रभारी समेत 11, नगर एसओजी में 14, गंगानगर में 10 और यमुनानगर एसओजी में 9 पुलिसकर्मी तैनात थे। मुंबई क्राइम ब्रांच ने तीन सितंबर को कोसड़ा कला गांव में चल रही एमडी ड्रग फैक्ट्री का खुलासा किया था। बताया जा रहा है कि यह फैक्ट्री कई महीनों से चल रही थी, लेकिन स्थानीय पुलिस और एसओजी टीमों को इसकी जानकारी नहीं हो सकी। इसी वजह से पुलिस की सूचना व्यवस्था और निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं।
बताया जा रहा है कि फैक्ट्री गांव से बाहर एक शेड में चल रही थी। इस शेड में ड्रग तैयार करने के लिए जरूरी उपकरण लगाए गए थे। स्थानीय पुलिसकर्मी और बीट सिपाही इलाके में आते-जाते भी थे, लेकिन किसी ने यह पता लगाने की कोशिश नहीं की कि सुनसान जगह पर बना यह शेड आखिर किसका है और वहां क्या गतिविधियां चल रही हैं। अब फैक्ट्री के सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि इतने लंबे समय तक पुलिस को इसकी भनक क्यों नहीं लगी।
इस मामले में आने वाले दिनों में कुछ और पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक, अधिकारियों की ओर से ऐसे पुलिसकर्मियों की सूची तैयार की जा रही है, जिनकी भूमिका या लापरवाही की जांच की जा सकती है। इसमें मांडा थाने के साथ आसपास के थानों में तैनात पुलिसकर्मी भी शामिल हो सकते हैं। फिलहाल चारों एसओजी को भंग करने के बाद पुलिस महकमे में इसे लेकर चर्चाएं तेज हैं और मुंबई क्राइम ब्रांच की कार्रवाई ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।