प्रयागराज न्यूज डेस्क: उत्तर प्रदेश में नकली भारतीय मुद्रा के बढ़ते मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। राजधानी लखनऊ में बड़ी मात्रा में जाली नोट बरामद होने के कुछ ही दिनों बाद प्रयागराज के एक प्रमुख मंदिर के दान पात्रों में भी नकली नोट मिलने से यह आशंका गहरा गई है कि प्रदेश में कोई संगठित गिरोह जाली करेंसी को खपाने में जुटा हो सकता है। दोनों मामलों की जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) द्वारा की जा रही है।
प्रयागराज के सिविल लाइंस स्थित श्रीहनुमत निकेतन मंदिर के दान पात्रों से नौ नकली नोट बरामद हुए हैं। इनमें 500 रुपये का एक नोट, 200 रुपये के पांच नोट और 100 रुपये के तीन नोट शामिल हैं। मंदिर में पिछले कुछ वर्षों से प्रबंधन और चढ़ावे की राशि को लेकर विवाद चल रहा है। न्यायालय के आदेश के बाद जिला प्रशासन मंदिर के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहा है और दान राशि को नियमित रूप से बैंक खाते में जमा कराया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, जनवरी से मार्च 2026 के दौरान छह दान पात्रों से निकाली गई करीब 13 लाख रुपये की राशि बैंक में जमा कराई जा रही थी। इसी दौरान नोटों की गिनती करने वाली मशीन ने नौ नकली नोटों की पहचान की। बैंक द्वारा सूचना दिए जाने के बाद प्रशासन ने मामले की रिपोर्ट तैयार की, जिसके आधार पर जांच एजेंसियां सक्रिय हुईं। अधिकारियों का मानना है कि संभव है दान देने वालों को खुद यह जानकारी न रही हो कि उनके पास मौजूद नोट नकली थे और वे बाजार के माध्यम से उनके हाथों तक पहुंचे हों।
इससे पहले 9 जून को लखनऊ के मड़ियांव क्षेत्र में पुलिस ने 13.95 लाख रुपये की नकली करेंसी के साथ तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। आरोपियों के पास से 500 और 100 रुपये के हजारों जाली नोट बरामद किए गए थे। पूछताछ में आरोपियों ने आजमगढ़ के कुछ लोगों को इस नेटवर्क का सरगना बताया था, जो फिलहाल फरार हैं। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने प्रदेश में नकली नोटों के नेटवर्क को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं और जांच एजेंसियां इसके स्रोत तथा पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं।