भारत में तेजी से बढ़ती ‘गिग इकोनॉमी’ ने रोजगार के पारंपरिक तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है। जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट और उबर जैसे प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले लाखों युवाओं के लिए अब एक बड़ी खुशखबरी आई है। भारत सरकार ने नए सोशल सिक्योरिटी कोड (Social Security Code) के तहत इन वर्कर्स को कानूनी सुरक्षा और सामाजिक लाभ देने के लिए ड्राफ्ट नियम जारी कर दिए हैं।
यह कदम उन करोड़ों लोगों के लिए मील का पत्थर साबित होगा जो अब तक 'असंगठित क्षेत्र' का हिस्सा माने जाते थे और किसी भी तरह की कॉर्पोरेट सुरक्षा से वंचित थे।
पात्रता के कड़े लेकिन व्यावहारिक नियम
नए नियमों के अनुसार, सामाजिक सुरक्षा का लाभ हर किसी को तुरंत नहीं मिलेगा, बल्कि इसके लिए काम की निरंतरता को पैमाना बनाया गया है:
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एकल प्लेटफॉर्म: यदि कोई वर्कर केवल एक ही कंपनी (जैसे सिर्फ जोमैटो) के साथ काम करता है, तो उसे एक साल में कम से कम 90 दिन काम करना अनिवार्य होगा।
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बहु-प्लेटफॉर्म (Multi-platforming): जो लोग एक से अधिक कंपनियों के लिए काम करते हैं, उनके लिए यह सीमा 120 दिन तय की गई है।
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गिनती का तरीका: यदि कोई व्यक्ति एक ही दिन में तीन अलग-अलग एग्रीगेटर्स के लिए काम करता है, तो उसे तीन दिन की सेवा माना जाएगा। इससे पार्ट-टाइम काम करने वालों के लिए 120 दिन का कोटा पूरा करना आसान हो जाएगा।
पंजीकरण और डिजिटल पहचान: ई-श्रम पोर्टल का महत्व
सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल इंडिया का सहारा लिया है।
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ई-श्रम पोर्टल: 16 वर्ष से अधिक आयु के हर गिग वर्कर को अपना रजिस्ट्रेशन ई-श्रम पोर्टल पर कराना होगा। यह डेटा उनके आधार कार्ड से लिंक होगा।
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विशिष्ट पहचान संख्या (UAN): जैसे पीएफ धारकों के पास एक परमानेंट नंबर होता है, वैसे ही गिग वर्कर्स को भी एक यूनिक आईडी और डिजिटल पहचान पत्र दिया जाएगा। यह कार्ड पूरे देश में उनकी पात्रता का प्रमाण होगा।
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एग्रीगेटर्स की जिम्मेदारी: अब कंपनियों को अपने हर वर्कर (चाहे वह थर्ड-पार्टी एजेंसी के जरिए ही क्यों न हो) का डेटा सरकारी पोर्टल पर अपडेट करना अनिवार्य होगा।
मिलने वाली प्रमुख सुविधाएं: एक नई सुरक्षा छतरी
नए नियमों का मुख्य उद्देश्य गिग वर्कर्स को वह सम्मान और सुरक्षा देना है जो अब तक केवल वाइट-कॉलर जॉब्स में मिलती थी।
| सुविधा |
विवरण |
| आयुष्मान भारत |
वर्कर्स को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलेगा। |
| दुर्घटना कवर |
काम के दौरान दुर्घटना होने पर बीमा राशि का प्रावधान। |
| स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा |
कम प्रीमियम या मुफ्त स्वास्थ्य सुरक्षा। |
| पेंशन की संभावना |
भविष्य में वर्कर और कंपनी के संयुक्त योगदान से पेंशन योजना की तैयारी। |
आयु और काम की शर्तें
यह सुरक्षा चक्र मुख्य रूप से सक्रिय कामकाजी उम्र के लोगों के लिए है। ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, 60 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद वर्कर इन लाभों के लिए अयोग्य हो जाएगा। इसके अलावा, सुविधाओं को चालू रखने के लिए हर वित्तीय वर्ष में न्यूनतम कार्य दिवसों (90 या 120 दिन) की शर्त को पूरा करना होगा।
निष्कर्ष
भारत में गिग इकोनॉमी को रेगुलेट करना समय की मांग थी। यह नया कानून न केवल वर्कर्स के शोषण को रोकेगा, बल्कि उन्हें एक गरिमामय जीवन जीने का आधार भी प्रदान करेगा। 2026 तक इन नियमों के पूरी तरह लागू होने से भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जहाँ गिग वर्कर्स को व्यापक सामाजिक सुरक्षा प्राप्त है।